मोबाइल से GST बिल कैसे बनाएं
GST बिल बनाने के लिए न बड़ा कंप्यूटर चाहिए, न अकाउंटेंट। दुकान पर बैठे-बैठे मोबाइल से बिल बनता है और ग्राहक के WhatsApp पर पहुँच जाता है। नीचे पहले यह समझिए कि GST बिल में क्या-क्या लिखना ज़रूरी है, फिर BillBabu ऐप में बिल बनाने का पूरा तरीका, हर क़दम की स्क्रीन के साथ।
यह तरीका GST में रजिस्टर्ड दुकान के लिए है, जिसके पास GSTIN (GST नंबर) है।
In English: GST Bill Format
GST बिल में क्या-क्या लिखना ज़रूरी है
क़ानून (CGST नियम 46) के हिसाब से टैक्स इनवॉइस, यानी GST बिल, पर ये बातें होनी चाहिए। BillBabu इन्हें ख़ुद बिल पर छाप देता है, बस आपको सही जानकारी एक बार डालनी है।
| क्या | कैसे लिखें |
|---|---|
| आपकी दुकान | नाम, पता और GSTIN |
| बिल नंबर और तारीख़ | 16 अक्षर तक, पूरे साल में हर नंबर अलग |
| ग्राहक | नाम, पता, और ग्राहक GST में रजिस्टर्ड है तो उसका GSTIN |
| सामान | नाम, HSN कोड, मात्रा और यूनिट (Pcs, Kg, Ltr…) |
| रक़म | हर सामान की रक़म (टैक्स से पहले), GST का रेट और GST की रक़म |
| जगह | दूसरे राज्य में बिक्री हो तो "प्लेस ऑफ़ सप्लाई" (उस राज्य का नाम) |
| बाकी | कुल रक़म, रिवर्स चार्ज लगता है या नहीं, और आपके दस्तख़त |
₹50,000 या उससे ज़्यादा का बिल किसी बिना-GST वाले ग्राहक को दें, तो उसका नाम, पता और राज्य भी लिखिए। पूरी लिस्ट, भरे हुए नमूने के साथ (अंग्रेज़ी में): GST bill format।
पहली बार: दुकान का नाम, GSTIN और लोगो डालिए
Google Play से BillBabu डाउनलोड कीजिए और मोबाइल नंबर से OTP डालकर खाता बनाइए। फिर दुकान की जानकारी भरिए: दुकान का नाम, पता, राज्य, GSTIN और चाहें तो लोगो। बैंक खाते की जानकारी भी डाल दीजिए, यह बिल पर छपेगी और इसी से UPI QR कोड बनेगा। यह काम सिर्फ़ एक बार करना है।
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ग्राहक (पार्टी) जोड़िए
नया बिल शुरू करते ही पहला क़दम “पार्टी” है। पुराना ग्राहक है तो लिस्ट से चुन लीजिए, नया है तो जोड़िए: नाम, फ़ोन, पता, राज्य और GSTIN (अगर ग्राहक GST में रजिस्टर्ड है)।
GSTIN 15 अक्षर का होता है। ऐप उसका फ़ॉर्मेट जाँचता है, यानी कोई अक्षर छूटा या ग़लत जगह लिखा हो तो पता चल जाता है। राज्य सही चुनिए, क्योंकि इसी से तय होता है कि बिल पर CGST + SGST लगेगा या IGST।

सामान जोड़िए: रेट, HSN कोड और GST
दूसरे क़दम “विवरण” में बिल की तारीख़, पेमेंट की शर्तें, गाड़ी नंबर जैसी बातें भरिए (जो ज़रूरी न हों, छोड़ दीजिए)। तीसरे क़दम “सामान” में “कैटलॉग से जोड़ें” दबाकर सेव किया हुआ सामान चुनिए: उसकी कीमत, HSN कोड और GST अपने-आप आ जाते हैं, आपको सिर्फ़ मात्रा डालनी है।
नया सामान हो तो नाम, HSN कोड, यूनिट, मात्रा, कीमत और GST % ख़ुद भरिए। 22 सितंबर 2025 से ज़्यादातर सामान पर 5% या 18% GST है। किसी सामान का रेट पक्का न हो तो HSN code finder में देखिए या CA से पूछिए।

बिल देखिए और सेव कीजिए
चौथा क़दम “समीक्षा” है। यहाँ सारा सामान, टैक्स से पहले की रक़म, GST और कुल रक़म एक साथ दिखती है, साथ में यह भी कि बिक्री अपने राज्य में है (CGST + SGST) या दूसरे राज्य में (IGST)। सब ठीक हो तो “Create” दबाइए। बिल सेव हो जाता है, बिल नंबर अपने-आप लग जाता है और सामान का स्टॉक घट जाता है।
PDF WhatsApp पर भेजिए
बिल खोलिए और ऊपर शेयर का बटन दबाइए। फ़ोन की शेयर लिस्ट खुलेगी: WhatsApp चुनिए, ग्राहक चुनिए और भेज दीजिए। ईमेल, Drive या प्रिंटर पर भी भेज सकते हैं। बिल का डिज़ाइन बदलना हो तो 5 डिज़ाइन में से कोई भी चुनिए।

अपने राज्य का ग्राहक या दूसरे राज्य का: CGST+SGST या IGST
नियम सीधा है। माल जिस राज्य में पहुँच रहा है (प्लेस ऑफ़ सप्लाई), अगर वह आपकी दुकान वाला राज्य ही है, तो GST दो बराबर हिस्सों में बँटता है: आधा CGST (केंद्र का) और आधा SGST (राज्य का)। दूसरा राज्य है तो पूरा GST एक साथ IGST बनकर लगता है। कुल टैक्स दोनों में बराबर रहता है।
| बिक्री | टैक्स | कुल बिल |
|---|---|---|
| पुणे से पुणे (महाराष्ट्र में ही) | CGST ₹9,000 + SGST ₹9,000 | ₹1,18,000 |
| पुणे से अहमदाबाद (गुजरात) | IGST ₹18,000 | ₹1,18,000 |
GSTIN के पहले दो अंक राज्य का कोड होते हैं: 27 महाराष्ट्र, 24 गुजरात, 09 उत्तर प्रदेश, 07 दिल्ली। किसी रक़म पर टैक्स ख़ुद जाँचना हो तो GST calculator चलाइए।
आम गलतियाँ
- ग्राहक का GSTIN ग़लत लिखना: ग्राहक को टैक्स का फ़ायदा (इनपुट टैक्स क्रेडिट) नहीं मिलता। एक बार मिलाकर देख लीजिए।
- ग्राहक का राज्य ग़लत चुनना: अपने राज्य वाले बिल पर IGST या दूसरे राज्य वाले पर CGST + SGST लग जाता है।
- पुराने रेट पर बिल बनाना: 22 सितंबर 2025 से बहुत से सामान का GST बदल गया है। सेव किए सामान का रेट एक बार जाँच लीजिए।
- HSN कोड न लिखना: ₹5 करोड़ तक टर्नओवर है तो रजिस्टर्ड ग्राहक के बिल पर कम से कम 4 अंक का कोड ज़रूरी है।
- एक ही बिल नंबर दोबारा देना: हर नंबर अलग होना चाहिए। ऐप में नंबर अपने-आप लगता है, तो यह गलती नहीं होती।
सवाल-जवाब
- क्या बिना GST नंबर के GST बिल बना सकते हैं?
- नहीं। GST वाला टैक्स इनवॉइस सिर्फ़ GST में रजिस्टर्ड दुकान ही बना सकती है। कंपोज़िशन वाले दुकानदार "बिल ऑफ़ सप्लाई" देते हैं, जिसमें GST नहीं जुड़ता। BillBabu अभी सिर्फ़ टैक्स इनवॉइस बनाता है।
- HSN कोड कितने अंक का लिखना है?
- पिछले साल का टर्नओवर ₹5 करोड़ तक है तो रजिस्टर्ड ग्राहक के बिल पर कम से कम 4 अंक। ₹5 करोड़ से ज़्यादा है तो हर बिल पर 6 अंक।
- बिल नंबर कैसा होना चाहिए?
- 16 अक्षर तक, और पूरे वित्त वर्ष में हर नंबर अलग। BillBabu नंबर अपने-आप लगाता है, जैसे INV-2026-0001, INV-2026-0002।
- क्या बिल की PDF हिंदी में बनती है?
- अभी नहीं। ऐप हिंदी में चलता है, पर बिल की PDF अंग्रेज़ी में बनती है। ग्राहक और CA दोनों के लिए यह ठीक रहता है।
- GST का रेट कहाँ से पता करें?
- 22 सितंबर 2025 से ज़्यादातर सामान 5% या 18% पर है, कुछ महंगी या नुकसानदेह चीज़ें 40% पर, और कुछ सामान पर GST नहीं लगता। अपने सामान का रेट HSN कोड फ़ाइंडर में देखिए या CA से पूछिए।