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title: "MSME 45 दिन पेमेंट नियम: ट्रेडर पर लागू है या नहीं"
description: "MSME का 45 दिन वाला पेमेंट नियम ट्रेडर पर कब लागू होता है, बेचते समय और ख़रीदते समय। देर होने पर ब्याज, इनकम टैक्स पर असर, उदाहरण के साथ आसान हिंदी में।"
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last_updated: "2026-10-27"
site: "BillBabu App (https://billbabu.com)"
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# MSME 45 दिन पेमेंट नियम: ट्रेडर पर लागू है या नहीं

बाज़ार में यह बात ख़ूब चल रही है: “MSME वाले को 45 दिन में पेमेंट नहीं किया, तो ब्याज भी लगेगा और इनकम टैक्स में ख़र्च भी नहीं घटेगा।”

आप थोक या रिटेल ट्रेडर हैं, तो आपके लिए दो अलग सवाल हैं। पहला: आप माल **बेचते** हैं, तो क्या यह नियम आपकी अटकी उधारी जल्दी दिलाएगा? दूसरा: आप माल **ख़रीदते** हैं, तो क्या आपको 45 दिन में पेमेंट करना ही होगा? दोनों का जवाब इस पर टिका है कि सामने वाला कौन है।

**छोटा जवाब:**

- **ट्रेडर, बेचने वाले के तौर पर:** आम तौर पर नहीं। MSME मंत्रालय के मुताबिक़ Udyam पर रजिस्टर्ड ट्रेडर का फ़ायदा सिर्फ़ प्रायोरिटी सेक्टर लोन तक है।
- **ट्रेडर, ख़रीदने वाले के तौर पर:** हाँ, अगर आपका सप्लायर माइक्रो या स्मॉल **मैन्युफ़ैक्चरर या सर्विस देने वाला** है और उसके पास Udyam रजिस्ट्रेशन है।

In English: [MSME 45-day payment rule](https://billbabu.com/blog/msme-45-day-payment-rule-section-43bh-compliance)

## नियम एक नज़र में

यह नियम [MSMED क़ानून, 2006](https://samadhaan.msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/MSMED2006act.pdf) की धारा 15 और 16 से आता है, और इनकम टैक्स वाला हिस्सा इनकम टैक्स क़ानून से।

- **लिखित में दिन तय हैं:** ख़रीदार को तय तारीख़ तक पेमेंट करना है। पर यह तय अवधि माल या सर्विस स्वीकार करने के दिन से **45 दिन से ज़्यादा नहीं** हो सकती (धारा 15)।
- **लिखित में कुछ तय नहीं:** तो स्वीकार करने के दिन से **15 दिन** के अंदर पेमेंट।
- **देर हुई तो ब्याज:** RBI के बैंक रेट का **तीन गुना**, हर महीने जुड़ने वाला चक्रवृद्धि ब्याज (धारा 16)।
- **देर हुई तो इनकम टैक्स:** समय-सीमा निकलने के बाद भी 31 मार्च तक पेमेंट नहीं हुआ, तो वह ख़र्च उस साल की आय से नहीं घटेगा; उसी साल घटेगा जिस साल पेमेंट करेंगे।

### “स्वीकार करने का दिन” कौन-सा है?

क़ानून की धारा 2(b) के हिसाब से:

- आम तौर पर, जिस दिन माल की डिलीवरी हुई या सर्विस दी गई।
- ख़रीदार ने डिलीवरी के 15 दिन के अंदर लिखकर आपत्ति की (माल ख़राब, कम आया वगैरह), तो वह दिन जब सप्लायर ने आपत्ति दूर की।
- 15 दिन में कोई लिखित आपत्ति नहीं, तो डिलीवरी का दिन ही स्वीकार का दिन माना जाता है।

## यह नियम किसकी रक्षा करता है

इस नियम में “सप्लायर” का मतलब है **माइक्रो या स्मॉल उद्यम** (धारा 2(n))। सरकार के [MSME समाधान पोर्टल](https://samadhaan.msme.gov.in/) के मुताबिक़ वहाँ शिकायत वही माइक्रो या स्मॉल उद्यम कर सकता है जिसके पास वैध Udyam रजिस्ट्रेशन हो। मीडियम उद्यम इस नियम में नहीं आते।

माइक्रो, स्मॉल या मीडियम कौन है, यह 1 अप्रैल 2025 से इन सीमाओं से तय होता है ([MSME मंत्रालय की अधिसूचना S.O. 1364(E)](https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/261838.pdf)):

| उद्यम | प्लांट-मशीनरी या उपकरण में निवेश | सालाना टर्नओवर |
| --- | --- | --- |
| माइक्रो | ₹2.5 करोड़ तक | ₹10 करोड़ तक |
| स्मॉल | ₹25 करोड़ तक | ₹100 करोड़ तक |
| मीडियम (45 दिन वाले नियम में नहीं) | ₹125 करोड़ तक | ₹500 करोड़ तक |

Udyam रजिस्ट्रेशन कैसे होता है (अंग्रेज़ी में): [Udyam registration step by step](https://billbabu.com/blog/udyam-registration-step-by-step)।

## आप ट्रेडर हैं: दो सवाल, दो जवाब

### जब आप माल बेचते हैं

2021 से थोक और रिटेल ट्रेडर Udyam पर रजिस्टर हो सकते हैं। पर MSME मंत्रालय के [2 जुलाई 2021 के ऑफ़िस मेमोरेंडम](https://udyamregistration.gov.in/docs/OM_regarding_inclusion_of_Traders02072021.pdf) में साफ़ लिखा है कि थोक और रिटेल ट्रेड वाले MSME के फ़ायदे **सिर्फ़ प्रायोरिटी सेक्टर लोन** तक सीमित हैं।

इसका मतलब: आपकी अपनी बिक्री की उधारी के लिए 45 दिन वाले नियम या MSME समाधान के भरोसे मत बैठिए। अपना पैसा आम तरीके से वसूलिए:

- हर बिल पर पेमेंट की आख़िरी तारीख़ और शर्तें लिखिए।
- महीने की शुरुआत में हर पार्टी को उसका खाता भेजिए।
- तारीख़ निकले तो विनम्र, फिर साफ़ रिमाइंडर। नमूने: [पेमेंट रिमाइंडर मैसेज हिंदी में](https://billbabu.com/hi/payment-reminder-message)।

कोई ख़ास मामला हो (जैसे आप ट्रेडिंग के साथ कुछ बनाते भी हैं), तो अपने CA या वकील से पूछिए।

### जब आप माल ख़रीदते हैं

यहाँ नियम आप पर लागू हो सकता है। अगर आपका सप्लायर:

- माइक्रो या स्मॉल उद्यम है,
- मैन्युफ़ैक्चरिंग करता है या सर्विस देता है (ट्रेडिंग नहीं),
- और उसके पास Udyam रजिस्ट्रेशन है,

तो उसका पेमेंट तय दिनों में (ज़्यादा से ज़्यादा 45 दिन) करना है, और लिखित शर्त न हो तो 15 दिन में।

अगर आप किसी दूसरे थोक या रिटेल ट्रेडर से माल लेते हैं, तो ऊपर वाले 2021 के मेमोरेंडम के हिसाब से आम तौर पर वह सप्लायर इस नियम में नहीं आता। फिर भी अपने CA से पक्का कीजिए।

**सप्लायर के बारे में कैसे पता करें?** नए सप्लायर से Udyam सर्टिफ़िकेट की कॉपी माँगिए और देखिए कि वह माइक्रो, स्मॉल या मीडियम है, और उसका काम क्या है। NIC कोड 45, 46 या 47 वाले काम थोक और रिटेल ट्रेड के हैं (2021 का मेमोरेंडम)। साथ में उसका GST नंबर भी जाँच लीजिए: [सप्लायर का GST नंबर कैसे चेक करें](https://billbabu.com/hi/gst-number-kaise-check-kare)।

### छोटे ठेकेदार और सर्विस देने वाले

बिजली-फ़िटिंग, प्लंबिंग, मरम्मत या ठेकेदारी जैसी सर्विस देने वाला छोटा कारोबारी, जिसके पास सर्विस उद्यम के तौर पर Udyam है, **सप्लायर के तौर पर इस नियम में आता है**। बिल्डर या कंपनी उसका पेमेंट 45 दिन से ज़्यादा रोके, तो वह MSME समाधान पर शिकायत कर सकता है। पूरा तरीका (अंग्रेज़ी में): [MSME Samadhaan guide](https://billbabu.com/blog/msme-samadhaan-delayed-payments-recovery-filing-guide)।

## देर हुई तो क्या होगा

### ब्याज: बैंक रेट का तीन गुना

धारा 16 के मुताबिक़ देर होने पर ख़रीदार को RBI के बैंक रेट के तीन गुना पर ब्याज देना होता है, और यह ब्याज हर महीने मूल रक़म में जुड़ता जाता है (monthly rests)। यह शर्त आपसी समझौते से हटाई नहीं जा सकती।

[RBI](https://www.rbi.org.in/) की वेबसाइट पर 27 अक्टूबर 2026 को बैंक रेट 5.75% था। यानी ब्याज **17.25% सालाना** बनता है। बैंक रेट बदलता रहता है, इसलिए हिसाब के दिन का रेट RBI की वेबसाइट पर देखिए।

ब्याज कहाँ से गिना जाएगा: तय तारीख़ के अगले दिन से, और लिखित शर्त न हो तो स्वीकार करने के 15 दिन बाद वाले दिन से।

एक और बात: MSMED क़ानून की धारा 23 कहती है कि यह ब्याज इनकम टैक्स के हिसाब में ख़र्च के तौर पर नहीं घटता।

### इनकम टैक्स: ख़र्च उसी साल घटेगा जिस साल पेमेंट होगा

1 अप्रैल 2026 से नया [Income-tax Act, 2025](https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/265620.pdf) लागू है। इसकी **धारा 37(2)(g)** कहती है कि माइक्रो या स्मॉल उद्यम को MSMED क़ानून की धारा 15 की समय-सीमा के बाद देय रक़म, ख़र्च के तौर पर सिर्फ़ उसी टैक्स साल में घटेगी जिसमें वह असल में चुकाई गई।

- **टैक्स साल 2026-27 से (1 अप्रैल 2026 के बाद):** नया क़ानून, धारा 37(2)(g)।
- **2025-26 और उससे पहले के साल:** यही बात पुराने Income-tax Act, 1961 की [धारा 43B(h)](https://www.incometaxindia.gov.in/w/section-43b-42) में थी।
- **रिटर्न की तारीख़ तक की छूट नहीं:** धारा 37 में कुछ और ख़र्चों (जैसे टैक्स, PF) के लिए छूट है कि साल ख़त्म होने के बाद पर रिटर्न की आख़िरी तारीख़ से पहले चुका दें, तो उसी साल घट जाएँ। MSME वाले इस हिस्से पर यह छूट **नहीं** है (धारा 37(3))।

### अनुमानित टैक्स (44AD) वाले छोटे कारोबारी

अगर आप अनुमानित आय वाली स्कीम में रिटर्न भरते हैं (पुराने क़ानून में धारा 44AD), तो यह नियम आप पर किस तरह असर करेगा, यह अपने CA से पूछिए। स्कीम के बारे में (अंग्रेज़ी में): [Section 44AD](https://billbabu.com/blog/section-44ad-presumptive-taxation)।

## क्या 45 दिन वाला नियम टल गया या तारीख़ बढ़ी?

27 अक्टूबर 2026 तक हमें किसी सरकारी साइट पर ऐसा नोटिस नहीं मिला जो 45 दिन वाले नियम को टालता या बढ़ाता हो। नए Income-tax Act, 2025 में भी यह धारा 37(2)(g) के रूप में मौजूद है।

संसद ने अगस्त 2026 में MSMED (संशोधन) बिल, 2026 पास किया। सरकार की [PIB फ़ैक्टशीट](https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2026/aug/doc2026811951101.pdf) के मुताबिक़ इसमें पेमेंट के झगड़े जल्दी निपटाने (मध्यस्थता 90 दिन में), सरकारी कंपनियों के MSME बिल TReDS से चुकाने, और ज़्यादा फ़ैसिलिटेशन काउंसिल जैसी बातें हैं। फ़ैक्टशीट में 45 दिन की सीमा या ब्याज बदलने की बात नहीं है। इस क़ानून के हिस्से सरकार की अधिसूचना वाली तारीख़ों से लागू होते हैं, इसलिए किसी ख़ास बदलाव पर भरोसा करने से पहले CA से पूछ लीजिए।

WhatsApp पर “नियम ख़त्म” या “तारीख़ बढ़ी” जैसे मैसेज आएँ, तो MSME मंत्रालय या इनकम टैक्स विभाग की साइट पर देखे बिना मत मानिए।

## उदाहरण: राठौर ट्रेडर्स, जयपुर

**उदाहरण (नाम, तारीख़ और रक़म काल्पनिक):** “राठौर ट्रेडर्स” जयपुर का एक थोक व्यापारी है, Udyam पर माइक्रो के तौर पर रजिस्टर्ड।

**1. बेचने वाले के तौर पर।** राठौर ट्रेडर्स ने एक दुकान “गुप्ता स्टोर्स” को माल दिया, और पेमेंट दो महीने से अटका है। राठौर ट्रेडर्स ट्रेडर है, इसलिए 45 दिन वाले नियम या MSME समाधान के भरोसे नहीं बैठ सकता। रास्ता: रिमाइंडर, खाते की PDF, बात-चीत।

**2. मैन्युफ़ैक्चरर से ख़रीद।** राठौर ट्रेडर्स ने “पटेल प्लास्टिक्स” (माइक्रो मैन्युफ़ैक्चरर, Udyam वाला) से ₹2,00,000 का माल लिया। माल 10 फ़रवरी 2027 को आया, कोई आपत्ति नहीं हुई, और ऑर्डर पर लिखित में 45 दिन तय थे।

- पेमेंट की आख़िरी तारीख़: **27 मार्च 2027** (10 फ़रवरी से 45 दिन)।
- लिखित में दिन तय न होते, तो 25 फ़रवरी 2027 तक पेमेंट करना होता।
- 31 मार्च 2027 तक पेमेंट नहीं हुआ: यह ₹2,00,000 टैक्स साल 2026-27 की आय से नहीं घटेगा। अप्रैल 2027 में चुकाया, तो 2027-28 में घटेगा।
- ब्याज 28 मार्च 2027 से, 17.25% सालाना (आज के 5.75% बैंक रेट पर), हर महीने जुड़ता हुआ। पहले महीने का करीब ₹2,875, और दो महीने में ब्याज पर ब्याज मिलाकर करीब ₹5,790।

अगर यही माल 1 मार्च 2027 को आता, तो 45 दिन 15 अप्रैल 2027 को पूरे होते। ऐसे में 31 मार्च को समय-सीमा बाकी है, और 15 अप्रैल तक पेमेंट हो जाए तो आम तौर पर दिक़्क़त नहीं मानी जाती। ऐसे मामले CA से पक्का कीजिए।

**3. दूसरे ट्रेडर से ख़रीद।** राठौर ट्रेडर्स ने “जैन ट्रेडिंग कंपनी” (थोक व्यापारी) से माल लिया। 2021 के मेमोरेंडम के हिसाब से आम तौर पर यह सप्लायर 45 दिन वाले नियम में नहीं आता।

**4. छोटा ठेकेदार।** “वर्मा इलेक्ट्रिकल वर्क्स” एक छोटा बिजली ठेकेदार है, Udyam पर सर्विस उद्यम। उसने एक बिल्डर का काम किया। वह सप्लायर के तौर पर इस नियम में आता है, और 45 दिन से ज़्यादा देर होने पर MSME समाधान पर शिकायत कर सकता है।

## ख़रीदार के तौर पर चार आदतें

1. MSME सप्लायरों की सूची रखिए।

   किस सप्लायर के पास Udyam है, वह माइक्रो/स्मॉल है या मीडियम, और बनाता है, सर्विस देता है या ट्रेडिंग करता है।
2. पेमेंट के दिन लिखित में तय कीजिए।

   ऑर्डर (PO) या समझौते पर लिखिए, जैसे “माल मिलने के 30 दिन में पेमेंट”। 45 दिन से ज़्यादा न लिखें। शर्तें तय करने के तरीके (अंग्रेज़ी में): [Payment terms](https://billbabu.com/blog/payment-terms-negotiation-tactics)।
3. माल मिलने की तारीख़ नोट कीजिए।

   गिनती इसी से शुरू होती है। माल में कमी हो, तो 15 दिन के अंदर लिखकर बताइए।
4. 31 मार्च से पहले जाँच कीजिए।

   मार्च के आख़िरी हफ़्ते में MSME सप्लायरों के बकाया बिल देख लीजिए, ताकि समय-सीमा पार वाला कोई बिल 31 मार्च तक बिना चुकाए न रह जाए।

## बेचने वाले के तौर पर तीन आदतें

- हर बिल पर **पेमेंट की आख़िरी तारीख़** और शर्तें लिखिए।
- उधार की शर्तें पार्टी से लिखित में तय कीजिए, चाहे WhatsApp पर ही।
- हर महीने पार्टी को खाते का स्टेटमेंट भेजिए: [पार्टी का खाता और बकाया एक जगह](https://billbabu.com/hi/udhar-ka-hisab)।

देर से पेमेंट पर ब्याज की शर्त बिल पर लिखने के बारे में (अंग्रेज़ी में): [Late fee and interest on invoices](https://billbabu.com/blog/invoice-late-fee-interest-india)।

अपनी रक़म पर ब्याज का हिसाब लगाना हो, तो [MSME ब्याज कैलकुलेटर (टूल्स पेज पर)](https://billbabu.com/tools?tab=msme-interest) चलाइए; बैंक रेट उस दिन का डालिए।

## BillBabu App में

- बिक्री के हर बिल पर **“पेमेंट की आखिरी तारीख”** डाल सकते हैं; यह बिल की PDF पर छपती है।
- **“पेमेंट की शर्तें”** लिखने की जगह भी है, जैसे “माल मिलने के 30 दिन में पेमेंट”।
- जिस बिल की तारीख़ निकल गई, उसका स्टेटस आप ख़ुद **“तारीख निकल गई”** रख सकते हैं, और बिलों को इसी स्टेटस से छाँटकर देख सकते हैं।
- पार्टी की लिस्ट में हर ग्राहक का बकाया दिखता है, और उसके खाते की PDF बनाकर WhatsApp पर भेज सकते हैं।
- ख़रीद के बिल भी सप्लायर और तारीख़ के साथ दर्ज कर सकते हैं।

साफ़ बता दें: BillBabu App सप्लायरों का बकाया नहीं दिखाता, 45 दिन की गिनती या रिमाइंडर नहीं करता, और MSME ब्याज नहीं गिनता। अपने MSME सप्लायरों की तारीख़ें अलग से नोट रखिए, या अपने अकाउंटेंट से रखवाइए।

## सवाल-जवाब

**क्या ट्रेडर पर 45 दिन का पेमेंट नियम लागू होता है?**

बेचने वाले के तौर पर आम तौर पर नहीं, क्योंकि MSME मंत्रालय के 2021 के मेमोरेंडम के मुताबिक़ ट्रेडर के Udyam फ़ायदे सिर्फ़ प्रायोरिटी सेक्टर लोन तक हैं। ख़रीदने वाले के तौर पर हाँ, अगर सप्लायर Udyam वाला माइक्रो या स्मॉल मैन्युफ़ैक्चरर या सर्विस देने वाला है।

**सप्लायर के पास Udyam न हो तो?**

तो आम तौर पर वह इस नियम का “सप्लायर” नहीं माना जाता, और MSME समाधान पर भी वैध Udyam वाला ही शिकायत कर सकता है। सप्लाई के समय रजिस्ट्रेशन था या बाद में हुआ, ऐसे पेच अपने CA से पूछिए।

**45 दिन किस तारीख़ से गिनें?**

माल या सर्विस स्वीकार करने के दिन से। आम तौर पर यह डिलीवरी का दिन है। 15 दिन के अंदर लिखित आपत्ति हुई हो, तो वह दिन जब आपत्ति दूर हुई। लिखित में दिन तय न हों, तो सीमा 15 दिन है, 45 नहीं।

**देर से पेमेंट पर ब्याज कितना लगता है?**

RBI बैंक रेट का तीन गुना, हर महीने जुड़ने वाला। 27 अक्टूबर 2026 को बैंक रेट 5.75% था, यानी 17.25% सालाना। यह ब्याज इनकम टैक्स में ख़र्च के तौर पर भी नहीं घटता।

**क्या 45 दिन वाला नियम टल गया है?**

27 अक्टूबर 2026 तक हमें किसी सरकारी साइट पर नियम टालने या तारीख़ बढ़ाने का नोटिस नहीं मिला। नए Income-tax Act, 2025 में यह धारा 37(2)(g) के रूप में मौजूद है। कोई नया नोटिस आए, तो MSME मंत्रालय या इनकम टैक्स विभाग की साइट पर देखिए।

## शुरू कैसे करें

बिक्री के हर बिल पर पेमेंट की आख़िरी तारीख़ और हर ग्राहक का बकाया एक जगह चाहिए, तो [Google Play पर BillBabu App डाउनलोड करें](https://play.google.com/store/apps/details?id=com.billbabu.app&referrer=utm_source%3Dwebsite%26utm_medium%3Dhi_msme_45_days%26utm_campaign%3Dorganic)। शुरुआती बिल फ़्री, कार्ड की ज़रूरत नहीं; ज़्यादा बिलों के लिए Pro (पेड, Google Play से)।

**ज़रूरी बात:** यह पेज आम जानकारी के लिए है; यह टैक्स या क़ानूनी सलाह नहीं है। MSME और इनकम टैक्स के नियम, बैंक रेट और उद्यम की सीमाएँ बदलती रहती हैं, और कई बातें आपके सौदे की शर्तों पर टिकी होती हैं। कुछ भी करने से पहले नीचे दिए सरकारी स्रोत देखिए और अपने CA से बात कीजिए।

BillBabu App, Central Bharat Labs का एक प्राइवेट ऐप है; यह कोई सरकारी सेवा नहीं है और भारत सरकार, MSME मंत्रालय या इनकम टैक्स विभाग से जुड़ा नहीं है।

नियम जाँचे गए: 27 अक्टूबर 2026। मुख्य सरकारी स्रोत: [MSMED क़ानून, 2006](https://samadhaan.msme.gov.in/WriteReadData/DocumentFile/MSMED2006act.pdf), [MSME समाधान](https://samadhaan.msme.gov.in/), [ट्रेडर पर MSME मंत्रालय का मेमोरेंडम (2 जुलाई 2021)](https://udyamregistration.gov.in/docs/OM_regarding_inclusion_of_Traders02072021.pdf), [S.O. 1364(E), MSME की सीमाएँ](https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/261838.pdf), [Income-tax Act, 2025](https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/265620.pdf) ([धारा 37, इनकम टैक्स विभाग](https://www.incometaxindia.gov.in/w/section-37-169)), [RBI](https://www.rbi.org.in/)।

## ये भी पढ़िए

- [पेमेंट रिमाइंडर मैसेज पार्टी से बकाया माँगने के 10 नमूने।](https://billbabu.com/hi/payment-reminder-message)
- [उधारी का हिसाब किस ग्राहक पर कितना बाकी, मोबाइल में।](https://billbabu.com/hi/udhar-ka-hisab)
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- [MSME Interest Calculator MSME ब्याज कैलकुलेटर (टूल्स पेज पर, अंग्रेज़ी में)।](https://billbabu.com/tools?tab=msme-interest)
- [MSME Samadhaan guide MSME समाधान पर शिकायत कैसे करें (अंग्रेज़ी में)।](https://billbabu.com/blog/msme-samadhaan-delayed-payments-recovery-filing-guide)
- [Udyam registration Udyam रजिस्ट्रेशन (अंग्रेज़ी में)।](https://billbabu.com/blog/udyam-registration-step-by-step)

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